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लोक देवता पाबूजी राठौड़
प्लेग रक्षक | ऊँटों के देवता | लक्ष्मण अवतार
ॐ
📜 सामान्य परिचय
- जन्म स्थान: कोलू/कोलूमण्ड (फलौदी, जोधपुर)
- पिता: धांधल जी राठौड़
- माता: कमला दे
- घोड़ी: केसर कालमी
- पत्नी: फूलमदे (अमरकोट की राजकुमारी)
✨ उपनाम व पहचान
हाथ-फाड़ के देवता
गौ-रक्षक देवता
प्लेग रक्षक
शरणागत के रक्षक
“पाबूजी की पाग (पगड़ी) हमेशा बाईं ओर झुकी हुई दिखाई जाती है।”
⚔️ ऐतिहासिक गाथा
1
देवल चारणी की गायों को छुड़ाने के लिए अपने विवाह के फेरों के बीच से ही उठकर चले गए (मात्र 3 फेरे लिए)।
2
देचू का युद्ध: अपने बहनोई जींदराव खींची (जायल) के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
🎨 कला एवं संस्कृति
पाबूजी की फड़
राजस्थान की सबसे लोकप्रिय फड़। नायक जाति के भोपे ‘रावणहत्था’ वाद्य के साथ बांचते हैं।
पाबूजी के पवाड़े
वीर रस के भजन ‘माठ’ वाद्य यंत्र के साथ गाए जाते हैं।
📌 परीक्षा उपयोगी विशेष तथ्य:
- मारवाड़ में सर्वप्रथम ‘ऊँट’ लाने का श्रेय पाबूजी को है।
- ‘रायका/रेबारी’ जाति के प्रमुख आराध्य देव।
- ‘पाबू प्रकाश’ ग्रंथ की रचना ‘आशिया मोड़जी’ ने की।
- मेला: चैत्र अमावस्या (कोलमण्ड)।
