Pabuji Notes | पाबूजी नोट्स हिंदी

लोक देवता पाबूजी महाराज – Digital Guide

लोक देवता पाबूजी महाराज

“ऊंटों के देवता, शरणागत के रक्षक और राजस्थान के गौरव”

लक्ष्मण अवतार
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केसर कालमी

विश्व प्रसिद्ध काले रंग की घोड़ी, जो वीरता का प्रतीक है।

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भाला और पाग

हाथ में भाला और बाईं ओर झुकी हुई पगड़ी उनकी खास पहचान है।

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ऊंटों के देव

मारवाड़ में सर्वप्रथम ऊंट लाने का श्रेय पाबूजी को जाता है।

पाबूजी महाराज का दिव्य चित्र तैयार हो रहा है…

सांकेतिक चित्रण: पाबूजी महाराज अपनी घोड़ी केसर कालमी पर सवार

जीवन परिचय

जन्म: पाबूजी का जन्म जोधपुर के कोळूमण्ड गाँव में धांधल जी राठौड़ के यहाँ हुआ था। उन्हें अदम्य साहस और शरणागत की रक्षा के लिए जाना जाता है।

त्याग की मिसाल: जब देवल देसारी की गायों को छुड़ाने की बात आई, तो पाबूजी ने अपने विवाह के साढ़े तीन फेरे लेकर ही गठबंधन तोड़ दिया और युद्ध के लिए निकल पड़े।

सामाजिक समरसता: पाबूजी ने थोरी भाइयों को अपने दरबार में स्थान देकर अछूतोद्धार और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

सांस्कृतिक विरासत

पाबूजी की फड़

यह राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध फड़ है। नायक भोपा इसे **रावणहत्था** वाद्य यंत्र के साथ बांचते हैं।

पाबूजी के पवाड़े

वीर गाथाओं को **माठ** वाद्य यंत्र के साथ गाया जाता है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाले होते हैं।

प्रमुख मेला

चैत्र अमावस्या

(कोळूमण्ड, फलौदी)

“पाबूजी महाराज की जय!”

राजस्थान के लोक देवताओं पर आधारित शैक्षिक प्रस्तुति

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